Wednesday, 12 October 2016

देशहित में निम्न प्रश्नों पर विचार करना जरुरी.

 निष्पक्ष व गैरराजनीतिक रहकर
" देशहित में निम्न प्रश्नों पर विचार करना जरुरी."

क्या बुद्धिजीवी और देशहित चिन्तक ऐसा सोचते या मानते है कि आजादी के समय निश्चितही " आरक्षण " की जरूरत थी, लेकिन शायद देश की " राजनीति " ने आरक्षित वर्ग के लोगों को संविधान में की गयी आरक्षण व्यवस्था के साथ नियोजित समय में आरक्षण के लाभ देनें की गति कमजोर रखवाई एवं आरक्षण की सीमावधी बढाते हुए आरक्षण को सत्ता पानें का एक राजकीय हथियार बना लिया ? ? ?
विगत कुछ वर्षों से संविधान में अनारक्षित वर्ग के नए नए समूह आरक्षण सुविधा का लाभ पानें के लिए शांतिपूर्ण या अशान्तिपूर्ण प्रदर्शन करके नई नई व्यवस्थाए स्थापित करानें के दबाव पैदा करते दिख रहे है, क्या इससे देश प्रगत होगा ? ? ?
क्या संविधान में अनारक्षित वर्ग के विशेष समूहों द्वारा आरक्षण लाभ हेतु आएदिन हों रहे प्रदर्शनों के दबावों में उक्त अनेक समूह विशेष को आरक्षण मिलते रहने से सामाजिक समरसता पर विपरीत परिणाम नहीं पडता है ???
जिन अनारक्षित समूहों द्वारा देश की शान्ति एवं समृद्धि का विचार करके कोई प्रदर्शन नहीं किया जाता है, ऐसे समूहों के कम आय प्राप्त करनेंवालों या गरीबो अथवा एकदम अति गरीबों की संख्या का ग्राफ क्यों बढता है ? ? क्या इसे रोकनें की आवश्यकता नहीं ? ? यदि आज नहीं तो निकट भविष्य में इन्हें आरक्षण देना क्या जरुरी या मजबूरी नहीं होगा ? ?
आखिर कब तक चलेगा यह आरक्षण का खेल ? ? ?.

" अतएव सरकार का लक्ष्य सफल समयबद्ध योजना के साथ आरक्षण के बजाय अति तीव्र गति से देश की प्रगति करते हुए प्रत्येक भारतीय का हर क्षेत्र में   " संरक्षण करना  " अधिक न्यायसंगत होगा. "

.... चंद्रकांत वाजपेयी.
जेष्ठ नागरिक, औरंगाबाद.

देशहित में निम्न प्रश्नों पर विचार करना जरुरी.

 निष्पक्ष व गैरराजनीतिक रहकर

" देशहित में निम्न प्रश्नों पर विचार करना जरुरी."

क्या बुद्धिजीवी और देशहित चिन्तक ऐसा सोचते या मानते है कि आजादी के समय निश्चितही " आरक्षण " की जरूरत थी, लेकिन शायद देश की " राजनीति " ने आरक्षित वर्ग के लोगों को संविधान में की गयी आरक्षण व्यवस्था के साथ नियोजित समय में आरक्षण के लाभ देनें की गति कमजोर रखवाई एवं आरक्षण की सीमावधी बढाते हुए आरक्षण को सत्ता पानें का एक राजकीय हथियार बना लिया ? ? ?
विगत कुछ वर्षों से संविधान में अनारक्षित वर्ग के नए नए समूह आरक्षण सुविधा का लाभ पानें के लिए शांतिपूर्ण या अशान्तिपूर्ण प्रदर्शन करके नई नई व्यवस्थाए स्थापित करानें के दबाव पैदा करते दिख रहे है, क्या इससे देश प्रगत होगा ? ? ?
क्या संविधान में अनारक्षित वर्ग के विशेष समूहों द्वारा आरक्षण लाभ हेतु आएदिन हों रहे प्रदर्शनों के दबावों में उक्त अनेक समूह विशेष को आरक्षण मिलते रहने से सामाजिक समरसता पर विपरीत परिणाम नहीं पडता है ???
जिन अनारक्षित समूहों द्वारा देश की शान्ति एवं समृद्धि का विचार करके कोई प्रदर्शन नहीं किया जाता है, ऐसे समूहों के कम आय प्राप्त करनेंवालों या गरीबो अथवा एकदम अति गरीबों की संख्या का ग्राफ क्यों बढता है ? ? क्या इसे रोकनें की आवश्यकता नहीं ? ? यदि आज नहीं तो निकट भविष्य में इन्हें आरक्षण देना क्या जरुरी या मजबूरी नहीं होगा ? ?
आखिर कब तक चलेगा यह आरक्षण का खेल ? ? ?.

" अतएव सरकार का लक्ष्य सफल समयबद्ध योजना के साथ आरक्षण के बजाय अति तीव्र गति से देश की प्रगति करते हुए प्रत्येक भारतीय का हर क्षेत्र में   " संरक्षण करना  " अधिक न्यायसंगत होगा. "

.... चंद्रकांत वाजपेयी.
जेष्ठ नागरिक, औरंगाबाद.

Wednesday, 5 October 2016

यदि यह समझें और व्यवहार करे तो ........ ???


" यदि यह समझे  और  व्यवहार करें तो ....... ??? "



  कई वर्षों से अपनें भारत पर बार बार आतंकी हमले हुए है और आज भी

आतंकी बेख़ौफ़ होकर, सीधे हमारी भारतीय सेना पर हमले कर रहे हैं |



लेकिन हमारी बहादुर सेना और हमारा नेतृत्व भी कमजोर नहीं,

उसनें कसौटी पर खरे उतरकर सर्जिकल स्ट्राईक से आतंकियों -

और शत्रुओं के छक्के छुडा दिए है |

==============================================

मित्रों, सोचनें का विषय है की आज जरुरत किस बात की है ?

==============================================


आज जरुरत है


" ज्ञान व एकता का मंत्र,

हर नागरिक के जीवन में व्याप्त हों "

और

"
 हर नागरिक के श्वास एवं प्रश्वास में "

निज नेता और अपनी सेना पर विश्वास हों |


''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''


लेकिन दुर्भाग्य से कुछ राजनेता सत्ता प्राप्ति की अघोषित लालसा से

वशीभूत होकर ढोंग कर रहे है | चंद राजनेता " राष्ट्रीय एकात्म होनें की

नाटकीय (झूठी) बाते करते हुए सरकार के साथ खड़े रहनें की बात तो

करते है लेकिन यथार्थ में उनमें से कुछ नेता सेना द्वारा किये गए

सर्जिकल स्ट्राइक का प्रमाण प्रस्तुत करनें की बात जाहिर करके अप्रत्यक्ष

रूपसे सरकार व सेना पर अविश्वास दर्शातहुए अपनेंही देश को दुर्बल और

शत्रु राष्ट्र को बलवान करनें का पाप रहे है | 




मात्र ऐसे पाप करनेंवाले राजनेताओं के विरुद्ध सभी देशभक्त नागरिक

पूरीतरह मौन रखकर सार्वजनिक बहिष्कार करे तो देश के लिए हितकर

हों सकेगा, संभव हो कि वे स्वयं भविष्य में सुधार जाएंगे |

साथ ही साथ केंद्र सरकार के समर्थकोंनें या सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं नें

भी सर्जिकल स्ट्राइक की विजयी घटनासे उत्प्रेरित होकर अति उत्साह

का सार्वजनिक प्रदर्शन करना अथवा भावी सत्ता पानें के लिए इस घटनासे

लाभ पानें हेतु आज ही वातावरण बनानें का प्रयत्न करना बिलकुल उचित

नहीं, क्योंकि यह स्थिति घातक बन सकती है |


.... चंद्रकांत वाजपेयी.
जेष्ठ नागरिक, औरंगाबाद. (महा.)

chandrakantvjp@gmail.com

Tuesday, 4 October 2016

आज जरुरत किस बात की है ?

कई वर्षों से  अपनें भारत पर बार बार आतंकी हमले हुए है ,
आज भी आतंकी बेख़ौफ़ होकर,
सीधे भारतीय सेना पर हमले कर रहे हैं.

हमारी बहादुर सेना और हमारा नेतृत्व भी कमजोर नहीं,  
उसनें कसौटी पर खरे उतरकर

सर्जिकल स्ट्राईक से शत्रुओं के छक्के छुडा दिए है |
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मित्रों, सोचनें का विषय है की आज जरुरत किस बात की है ?
===============================================================


आज जरुरत है

" ज्ञान व एकता का मंत्र,  हर नागरिक के जीवन में व्याप्त हों "

और

" हर नागरिक के श्वास एवं प्रश्वास में  "

निज नेता

और 

अपनी सेना पर विश्वास हों |


.... चंद्रकांत वाजपेयी.जेष्ठ नागरिक, औरंगाबाद. (महा.)chandrakantvjp@gmail.com



Monday, 12 September 2016

शिक्षा व्यवस्था में यह कमी दूर होनें की जरुरत.

"शिक्षा व्यवस्था में यह कमी दूर होनें की जरुरत. "





मित्रों,  पहले  औरंगाबाद के युवा   श्री अरुण फोके जी  का  अनुभव पढें :--  

एक छोटासा अनुभव
....                        
                                                      Image result for मन पर नियंत्रण

" जब मै खुदके फोटो यहाँ  फेसबुक पे पब्लिश करता हु तो

500+ likes मिलते है,   और  
जब देश की व्यवस्था सुधारने के

तरीके पब्लिश करता हु तो 50 तक नहीं मिलते है | "

 
देश से ज्यादा लोग मुझे, और मेरी फॅमिली को चाहते है ! WOW

....... अरुण फोके. औरंगाबाद.


चि. अरुण फोके जी,    मेरे सच्चे किन्तु कडवे अनुभवों को आपनें उद्घृत किया.   हार्दिक धन्यवाद

एवं     आपका हार्दिक आभार |

मेरा निजी चिंतन और विचार है कि

" लोगों का इस प्रकार से 
व्यवहार करनें का कारण हमारे देश में

लॉर्ड मैकाले की शिक्षा 
व्यवस्था का बिना संशोधन किये यथावत

अनुपालन करना मात्र है. "

मित्रों,

यह स्पष्ट है कि मैकाले की शिक्षा व्यवस्था  " टू-एच डेव्हलपमेंट "

प्रणाली पर आधारित है अर्थात मैकाले शिक्षा प्रणाली केवल हाथ (हैंड्स)

एवं सिर (हेड) कें विकास तक सिमित है | मैकाले की शिक्षा प्रणाली में

जब तक तीसरे ' 
एच ' अर्थात ह्रदय (हार्ट) या मन के जोड़ की व्यवस्था

नहीं होगी, तब तक 
मैकाले शिक्षा प्रणाली का यथावत अनुसरण

करनेंवाले सभी देशों में 
शिक्षा अपूर्ण रहेगी |

" शिक्षा में ह्रदय के जोड़ होनें पर ही सच्चे राष्ट्रीय भाव, मानवता,

प्रेम, सहयोग, आनंदित व समाधानी रहकर स्वयं शान्ति से जीवन

जीने की कला व दूसरों को ऐसा जीवन जीने देनें के व्यवहार के

साथ  स्वयं बुराई से दूर रहनें और बुराई से लड़ने की सच्ची क्षमता

छात्रों  को प्राप्त होगी
| "

अतएव मेरे विचार से 

भारत शासन द्वारा शीघ्रता शीघ्र स्कूल व कॉलेज स्तर पर

मन पर नियंत्रण की
व्यावहारिक शिक्षा 
का पाठ्यक्रम


निर्मित करके उसका हर स्कूल व कॉलेज में 
संचालन अनिवार्य किया
जाना उचित व देशहित में होगा |




अतएव शासन, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षा क्षेत्र से संबद्ध

अनुभवी महानुभाव, पैरेंट्स एक्शन कमिटीयों से संलग्न सभी सज्जन

और नागरिकगण उक्त विषय पर विचार करे एवं यथावश्यकता योग्य

कार्यवाही करे, यह अपेक्षित तथा विनम्रता पूर्वक निवेदित है |



विनम्र निवेदक :--
.  
चंद्रकांत वाजपेयी  
[ जेष्ठ नागरिक ] औरंगाबाद ( महाराष्ट्र )

ई-मेल :--  chandrakantvjp@gmail.com



Monday, 29 August 2016

डॉक्टरांनी सच्चे मानव आणि देवदूत अलंकाराचे खरे मानकरी व्हावे. नागरिकांनी नि:स्वार्थ देहदान-अवयवदान करावे |

२९ ऑगस्ट २०१६.
महाराष्ट्रातील सर्व डॉक्टरांनी सच्चे मानव 

आणि

देवदूत अलंकाराचे खरे मानकरी व्हावे.


प्रिय सम्मानीय डॉक्टर, नागरिकांना निरोगी ठेवणे, रक्त, ज्योती आणि गरजेनुसार अवयवांचे स्थापन करीत सक्षम चिकित्सा सेवा देणे, रुग्णाची जीवनवृद्धी करणे आणि हा अर्थप्राप्तीचा हा एक उम्दा अधिकृत व्यवसाय आहे असे गृहीत धरून आपल्या कुटुंबियांच्या उदरभरणासाठी या व्यवसायातून असीमित अर्थप्राप्ती करणे ही तुमची समज आणि ध्येयनिष्ठता आहे कां ? कदाचित असे नसेल, पण जर अशी समज असेल तर प्रत्येक प्रिय सम्मानीय डॉक्टरांनी ती समज निश्चितच मनातून पूर्णपणे काढून टाकावी. कृपाकरून सर्व डॉक्टरांनी अशा नकारात्मक विचाराने कधीच ग्रसित होऊ नयेविसरू नये कि डॉक्टरचे हातून देवदूता प्रमाणे सद्कर्त्तव्य घडत असतं. हा ईश्वर प्रसाद असून त्यांचे हे सौभाग्यच म्हणायला पाहिजे.


प्रत्येक डॉक्टर अर्थार्जन करीत जीवनात  कधी  न  कधी   नि:स्वार्थ  आणि 
नि: शुल्क  ममत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा करतो आणि रुग्णास नवजीवन देतो .   

 म्हणूनच डॉक्टर देवदूत म्हणविला जातो.  


परिस्थिती बघता आज अतिशय गरज आहे कि प्रत्येक डॉक्टरने स्वत:च कांही  रुग्णांसाठी कांही विशिष्ट प्रमाणात (कांही टक्के) बंधन राखून दररोज  मुळीच न विसरता नि:स्वार्थ व नि:शुल्क अशी परमार्थ चिकित्सा सेवा करावी
दररोज  पुण्य मिळवावे.डॉक्टरांनी सच्चे मानव व देवदूत अलंकाराचे  खरे  मानकरी व्हावे, 



अपेक्षा आणि विनंती आहे की    सर्व चिकीत्सकांनी  राज्य शासना कडून  ता. ३० ऑगस्ट ते ०१ सेप्टेम्बर २०१६ दरम्यान आयोजित 
" महा अवयवदान अभियान " 
या निमित्त स्वेच्छेने आत्मिक संकल्प घ्यावा की मी आजीवन देहदान-अवयवदान कां - कशासाठी आहे हे दररोज बोलता बोलता रुग्णांना आणि  त्यांच्या सहकार्यांना सांगत राहीन. जे कोणी माझ्या (डॉक्टरच्या) सल्याप्रमाने देहदान-अवयवदान करण्याचे इच्छापत्र स्वाक्षरी करून नोंदणीकृत होतील त्यांचा आत्मिक सम्मान करेन आणि निर्धन कुटुंम्बांच्या सदस्यांची (कांही निश्चित संख्येत) दररोज नि:शुल्क आणि नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवा करेन. 
अशा प्रकारे देशाला सकारात्मक नवदिशा नवउर्जा देईन.
आणि
"महाराष्ट्राचा सच्चा मानव व देवदूत अलंकाराचा खरा मानकरी होईन."

विनंती आहे की नागरिकांनी डॉक्टरच्या सल्याचा मान राखावा 
आणि
मानव जीवन संरक्षणार्थ नि:स्वार्थ देहदान-अवयवदान करावे.
  

महाराष्ट्र शासनास  महा अवयवदान अभियान आयोजनांसाठी
 हार्दिक धन्यवाद.
आयोजनाच्या सफलतेसाठी आत्मिक शुभकामना. 
निवेदक :-- 
चंद्रकांत वाजपेयी. (जेष्ठ नागरिक  [ नोंदणीकृत अंगदान आणि भावी अवयवदान प्रस्तावक.]
एल 1 / 5, कासलीवाल विश्व, औरंगाबाद, महाराष्ट्र.ई-मेल : chandrakantvjp@gmail.com 

डॉक्टरांनी सच्चे मानव आणि देवदूत अलंकाराचे खरे मानकरी व्हावे. नागरिकांनी नि:स्वार्थ देहदान-अवयवदान करावे |

२९ ऑगस्ट २०१६.
महाराष्ट्रातील सर्व डॉक्टरांनी सच्चे मानव 

आणि
देवदूत अलंकाराचे खरे मानकरी व्हावे.



प्रिय सम्मानीय डॉक्टर, नागरिकांना निरोगी ठेवणे, रक्त, ज्योती आणि गरजेनुसार अवयवांचे स्थापन करीत सक्षम चिकित्सा सेवा देणे, रुग्णाची जीवनवृद्धी करणे आणि हा अर्थप्राप्तीचा हा एक उम्दा अधिकृत व्यवसाय आहे असे गृहीत धरून आपल्या कुटुंबियांच्या उदरभरणासाठी या व्यवसायातून असीमित अर्थप्राप्ती करणे ही तुमची समज आणि ध्येयनिष्ठता आहे कां ? कदाचित असे नसेल, पण जर अशी समज असेल तर प्रत्येक प्रिय सम्मानीय डॉक्टरांनी ती समज निश्चितच मनातून पूर्णपणे काढून टाकावी. कृपाकरून सर्व डॉक्टरांनी अशा नकारात्मक विचाराने कधीच ग्रसित होऊ नयेविसरू नये कि डॉक्टरचे हातून देवदूता प्रमाणे सद्कर्त्तव्य घडत असतं. हा ईश्वर प्रसाद असून त्यांचे हे सौभाग्यच म्हणायला पाहिजे.


प्रत्येक डॉक्टर अर्थार्जन करीत जीवनात  कधी  न  कधी   नि:स्वार्थ  आणि 
नि: शुल्क  ममत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा करतो आणि रुग्णास नवजीवन देतो .   

 म्हणूनच डॉक्टर देवदूत म्हणविला जातो.  

परिस्थिती बघता आज अतिशय गरज आहे कि प्रत्येक डॉक्टरने स्वत:च कांही  रुग्णांसाठी कांही विशिष्ट प्रमाणात (कांही टक्के) बंधन राखून दररोज  मुळीच न विसरता नि:स्वार्थ व नि:शुल्क अशी परमार्थ चिकित्सा सेवा करावी
दररोज  पुण्य मिळवावे.डॉक्टरांनी सच्चे मानव व देवदूत अलंकाराचे  खरे  मानकरी व्हावे, 



अपेक्षा आणि विनंती आहे की    सर्व चिकीत्सकांनी  राज्य शासना कडून  ता. ३० ऑगस्ट ते ०१ सेप्टेम्बर २०१६ दरम्यान आयोजित 
" महा अवयवदान अभियान " 
या निमित्त स्वेच्छेने आत्मिक संकल्प घ्यावा की मी आजीवन देहदान-अवयवदान कां - कशासाठी आहे हे दररोज बोलता बोलता रुग्णांना आणि  त्यांच्या सहकार्यांना सांगत राहीन. जे कोणी माझ्या (डॉक्टरच्या) सल्याप्रमाने देहदान-अवयवदान करण्याचे इच्छापत्र स्वाक्षरी करून नोंदणीकृत होतील त्यांचा आत्मिक सम्मान करेन आणि निर्धन कुटुंम्बांच्या सदस्यांची (कांही निश्चित संख्येत) दररोज नि:शुल्क आणि नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवा करेन. 
अशा प्रकारे देशाला सकारात्मक नवदिशा नवउर्जा देईन.
आणि
"महाराष्ट्राचा सच्चा मानव व देवदूत अलंकाराचा खरा मानकरी होईन."

विनंती आहे की नागरिकांनी डॉक्टरच्या सल्याचा मान राखावा 
आणि
मानव जीवन संरक्षणार्थ नि:स्वार्थ देहदान-अवयवदान करावे.
  

महाराष्ट्र शासनास  महा अवयवदान अभियान आयोजनांसाठी
 हार्दिक धन्यवाद.
आयोजनाच्या सफलतेसाठी आत्मिक शुभकामना. 
निवेदक :-- 
चंद्रकांत वाजपेयी. (जेष्ठ नागरिक  [ नोंदणीकृत अंगदान आणि भावी अवयवदान प्रस्तावक.]
एल 1 / 5, कासलीवाल विश्व, औरंगाबाद, महाराष्ट्र.ई-मेल : chandrakantvjp@gmail.com